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कल्पवृक्ष के समान है भागवत कथा: केके दीक्षित


मड़ावरा ललितपुर | मडावरा के श्री श्री 1008 लहर धाम सरकार परिसर  में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक आचार्य श्री कृष्ण कुमार दीक्षित जी महाराज काशी द्वारा ध्रुव चरित्र और सती चरित्र का प्रसंग सुनाया गया ध्रुव चरित्र में भगवान ने भक्त की तपस्या से प्रसन्न होकर अटल पदवी देने का वर्णन किया मंदिर
लहर धाम परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में  गुरुवार को कथा प्रवक्ता ने कहा कि भगवान शिव की अनुमति लिए बिना उमा अपने पिता दक्ष के यहां आयोजित यज्ञ में पहुंच गईं। यज्ञ में भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिए जाने से कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया। इससे नाराज शिव के गणों ने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। इसलिए जहां सम्मान न मिले वहां कदापि नही जाना चाहिए। ध्रुव कथा प्रसंग में बताया कि सौतेली मां से अपमानित होकर बालक ध्रुव कठोर तपस्या के लिए जंगल को चल पड़े। बारिश, आंधी-तूफान के बावजूद तपस्या से न डिगने पर भगवान प्रगट हुए और उन्हें अटल पदवी प्रदान की। ऋषभ देव ने कथा सुनाते हुए कहा कि वह अपने पुत्रों को गोविंद का भजन करने का उपदेश देकर तपस्या को वन चले गए। भरत को हिरनी के बच्चे से अत्यंत मोह हो गया। नतीजे में उन्हें मृग योनि में जन्म लेना पड़ा समिति प्रबंधक जानकारी दी गई है भगवती चेतन समिति ट्रस्ट के प्रबंधक सचिव आचार्य श्री गोविंद शरण पुरोहितकाशी व मंच संचालन श्रीसंत यशोदानंदन रामायणी वृंदावन द्वारा कथा बताई गई है श्रवण के लिए आसपास के तमाम भक्त मौजूद रहे।

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