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श्रीमद् भागवत कथा में कंस वध रुक्मणी विवाह का प्रसंग


मडावरा l श्री श्री 1008 लहर धाम मंदिर परिसर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन रविवार को श्रीकृष्ण रुक्मणी विवाह का आयोजन बड़ी धूमधाम से किया गया
कथा में कथा वाचक आचार्य  कृष्ण कुमार दीक्षित काशी वालों ने कंस वध व रुक्मणी विवाह का प्रसंग भक्तों को सुनाया कथा वाचक ने कहा कि, प्रभु की कृपा के लिए भक्ति की आवश्यकता है। कथा में भगवान कृष्ण-रुक्मणी विवाह की झांकी सजाई गई तथा संगीतमय भजनों पर महिला श्रद्धालु मंत्र मुग्ध होकर जमकर झूमी। उन्होंने बताया कि विवाह उत्सव से पूर्व कथा वाचक ने कंस वध समेत विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने अपने मामा का नहीं बल्कि उसके अहंकार का वध किया। द्वापर युग में जब कंस का अत्याचार बढ़ा, तब भगवान विष्णु ने मनुष्य रूप में श्रीकृष्ण का जन्म लेकर बड़े-बड़े राक्षसों का वध करने के बाद अंत में पापी कंस का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से छुटकारा दिलाया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा नरेश के रूप में विराजमान होने के साथ देवी रुक्मणी से धूमधाम से विवाह किया। मंच पर जैसे ही श्रीकृष्ण-रुक्मणी का मिलन हुआ। श्रीहरि के जयघोष से पूरा पांडाल गूंज उठा। कथा वाचक द्वारा उद्घोषित मंत्रोचार के बीच जैसे ही विवाह का कार्य संपन्न हुआ तो श्रद्धालुओं की भीड़ ने पुष्प वर्षा की। पांडाल में सारा जनमानस भाव विहोर होकर झूम उठा। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु लोग पधारे

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