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माता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने लिया जन्म- प.सुदेश शास्त्री

दरियापुरा में बह रही है भागवत ज्ञान गंगा
सर्वजन हिताय हेतु चल रहा है यज्ञ
(मनीष यादव) टीकमगढ़:-देव माता अदिति ने विष्णु जी की तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे अदिति के पुत्र के रूप में जन्म लेकर देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्त करेंगे। उन्होंने कहा कि
इससे प्रसन्न होकर विष्णु प्रकट होकर बोले- देवी! चिंता मत करो। मैं तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म लेकर इंद्र को उसका खोया राज्य दिलाऊंगा। समय आने पर उन्होंने अदिति के गर्भ से वामन के रूप में अवतार लिया। उनके ब्रह्मचारी रूप को देखकर सभी देवता और ऋषि-मुनि आनंदित हो उठे। उन्होंने कहा कि एक दिन उन्हें पता चला कि राजा बलि स्वर्ग पर स्थायी अधिकार जमाने के लिए अश्वमेध यज्ञ करा रहा है। यह जानकर वामन वहां पहुंचे। उनके तेज से यज्ञशाला प्रकाशित हो उठी। बलि ने उन्हें एक उत्तम आसन पर बिठाकर उनका सत्कार किया और अंत में उनसे भेंट मांगने के लिए कहा। इस पर वामन चुप रहे। लेकिन जब बलि उनके पीछे पड़ गया तो उन्होंने अपने कदमों के बराबर तीन पग भूमि भेंट में मांगी। बलि ने उनसे और अधिक मांगने का आग्रह किया, लेकिन वामन अपनी बात पर अड़े रहे। इस पर बलि ने हाथ में जल लेकर तीन पग भूमि देने का संकल्प ले लिया। संकल्प पूरा होते ही वामन का आकार बढ़ने लगा और वे वामन से विराट हो गए। उन्होंने एक पग से पृथ्वी और दूसरे से स्वर्ग को नाप लिया। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना मस्तक आगे कर दिया। वह बोला- प्रभु, सम्पत्ति का स्वामी सम्पत्ति से बड़ा होता है। तीसरा पग मेरे मस्तक पर रख दें। सब कुछ गंवा चुके बलि को अपने वचन से न फिरते देख वामन प्रसन्न हो गए। उन्होंने ऐसा ही किया और बाद में उसे पाताल का अधिपति बना दिया और देवताओं को उनके भय से मुक्ति दिलाई। यह कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य सुरेश शास्त्री जी द्वारा श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कही गई। 
         
टीकमगढ़ जिले के चंदेरा थाना अंतर्गत ग्राम दरियापुर में कायस्थ परिवार द्वारा सर्वजन हिताय हेतु भगवान भोलेनाथ का मंदिर निर्माण कर शिव प्राण प्रतिष्ठा एवं श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन विगत 10 फरवरी से 17 फरवरी तक किया जा रहा है। मुख्य यजमान महेश प्रसाद खरे द्वारा बताया गया कि हमारे पूर्वजों द्वारा पहले से ही सारे ग्रामवासी और क्षेत्रवासियों के सर्व जनहित को देखते हुए इस तरह के धार्मिक आयोजन कराए जाते रहे हैं जिस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज मेरे और मेरे परिवार द्वारा यह धार्मिक आयोजन किया जा रहा है। जिसमें दरियापुरा के प्राचीन हनुमान जी महाराज मंदिर पर शिव मंदिर का निर्माण कर शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा पूरी रीति रिवाज हमारे कुलगुरू सुखदेव जी गंगेले भगवत जी गंगेले और बीना से पधारे पंडित आचार्य कृष्ण कुमार चतुर्वेदी द्वारा विधि विधान के साथ स्थापना की जा रही है वही श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कथा व्यास पंडित आचार्य सुदेश शास्त्री आचार्य धाम अचरा वाले द्वारा प्रतिदिन कराया जा रहा है। वही प्रातः 8:00 बजे से 1:00 बजे तक पूजन पीठ का पूजन और इसके बाद 2:00 बजे से हरि इच्छा तक श्रीमद् भागवत कथा की जा रही है। इस दौरान जगदीश प्रसाद खरे वीरेंद्र सिंह परिहार देवेंद्र सिंह परिहार वीर सिंह परिहार करण सिंह परिहार रमेश प्रसाद खरे बाबू सिंह परिहार दिनेश श्रीवास्तव सूर्य प्रकाश खरे राकेश खरे मनोज खरे बलराम कुशवाहा घमंडी लाल कुशवाहा कन्हैया लाल कुशवाहा सहित अनेको ग्राम वासी उपस्थित रहे।

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