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कृषि बिल के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा आहूत आठ दिसंबर को भारत बंद का ललितपुर में नहीं दिखा असर ।

किसान यूनियन एवं विपक्षी दल उतरे भारत बंद के समर्थन में किया विरोध प्रदर्शन दी गिरफ्तारियां । 
रमेश श्रीवास्तव ललितपुर 
कृषि कानून के खिलाफ देश में महीनों से किसान आंदोलन कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं ।साथ ही वह कृषि कानून को वापस लेने के लिए पिछले 14दिनों से दिल्ली की सीमा पर डटे किसान विरोध प्रदर्शन कर सरकार पर कृषि बिल को बापस लेने के लिए दवाब बनाने के लिए एड़ी चोटी का प्रयास कर रहे हैं । देश की राजधानी दिल्ली में धरना प्रदर्शन पर बैठे किसानों के समर्थन में उतरे राजनीतिक दलों ने किसान आंदोलन को और हवा दे दी । किसान आंदोलन के समर्थन में आठ दिसंबर मंगलवार को आहूत भारत बंद का असर बीजेपी सासित राज्यों में  बेअसर रहा हांलांकि केन्द्र सराकर द्वारा किसान नेताओं से लगातार बातचीत के प्रयास किए जा रहे हैं सराकर कृषि कानून में सुधार के लिए तैयार हैं लेकिन किसान संगठन के नेता तीनों कृषि कानूनों को बापस लेने की मांग पर अंडे हुए हैं और आगे आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं । बीते आठ दिसंबर को किसानों द्वारा आहुत भारत बंद का ललितपुर में कोई असर दिखाई नहीं दिया यहां पर राजनैतिक दलों का समर्थन तो मिला लेकिन ब्यापारियों ने भारत बंद के आह्वान में रुचि नहीं दिखाई और पूर्व की भांति बाजार खुले और खरीदारी होती रही । ललितपुर में  किसान आंदोलन के समर्थन में उतरे किसान यूनियन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस समाजवादी पार्टी आम आदमी पार्टी एवं बहुजन समाज पार्टी एवं अन्य विपक्षी दलों ने किसान आंदोलन के समर्थन में उतरकर कृषि  कानून के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया साथी राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया । वही ललितपुर पुलिस ने भारत बंद का समर्थन कर रहे एवं किसान बिल को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे राजनीतिक दलों के लगभग 85 आंदोलन कारीयों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था बाद में उन्हें साम के समय रिहा कर दिया गया ।किसान बिल के विरोध में देश भर से हजारों की संख्या में  किसान दिल्ली की सीमा पर डटकर आंदोलन कर रहे वहीं विपक्षी दल भी किसान आंदोलन के समर्थन में उतर आए हैं जिससे किसान आंदोलन को काफी बल मिला है विपक्षी दल तो पहले से ही केन्द्र की मोदी सरकार को घेरने के लिए वेचेन बैठे थे यैसे में किसान बिल पास होते ही विपक्षी दलों को सरकार को किसान विरोधी साबित करने का एक नया मुद्दा मिल गया ।किसान आंदोलन के समर्थन में मंगलवार को भारत बंद का आह्वान किया गया था  लेकिन ललितपुर जनपद में इस बंद का कोई असर दिखाई नहीं दिया । भारत बंद के समर्थन में उतरे किसान यूनियन ,समाजवादी पार्टी एवं कांग्रेस पार्टी ,बहुजन समाज पार्टी के कार्य कर्त्ताओं द्वारा कृषि बिल को वापस लेने के लिए जमकर विरोध प्रदर्शन किया किसान विरोधी कानून को वापस लेने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया कई बार पुलिस से भी झड़पें हुईं इस दौरान पुलिस द्वारा  लगभग 85 आंदोलन कारीयों को हिरासत में लिया गया बाद में उन्हें साम के समय रिहा कर दिया गया।
वहीं भारत बंद को लेकर ललितपुर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे जिलाधिकारी अन्नवी दिनेश कुमार एवं  पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में एसडीएम कृष्ण कुमार सिंह की मौजूदगी में  एवं सीओ सदर केशव नाथ शहर कोतवाल संजय कुमार शुक्ला द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे । भारत बंद को बेअसर करने के लिए पुलिस ने पूरी ताकत झोंक कर बंद के असर को बेअसर साबित कर दिया । बस स्टैंड रेलवे स्टेशन घंटाघर एवं शहर के महत्त्वपूर्ण स्थानों पर पुलिस की कड़ी पहरे दारी रही । किसानों एवं विपक्षी दलों द्वारा आयोजित बंद को शांति पूर्ण तरीके से समाप्त कराने के लिए भी पुलिस और प्रशासन दिन भर अलर्ट रहा । एसडीएम और सीओ द्वारा दिन भर आंदोलन कर रहे लोगों पर नजर रखी गई साथ ही हर स्थति से निपटने के लिए पुलिस मुस्तैद रही।

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