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नगर परिषद पलेरा की सीट लगातार 20 वर्षों से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित ।

              आरक्षण प्रतिक्रिया सवालों के घेरे में ?  

सामान्य वर्ग  एवं पिछड़ा के प्रत्याशियों की धड़कनें थमी  पलेरा (मनीष यादव) । नगरीय निकाय के चुनावों कि आरक्षण प्रतिक्रिया पूर्ण हो चुकी है लेकिन आरक्षण प्रतिक्रिया को लेकर पलेरा नगर में तरह-तरह की चर्चाएं  होती देखी जा सकती हैं लगातार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नगर परिषद सीट को लेकर लोगों के मन में तरह-तरह की सवाल खड़े हो रहे हैं लोगों का मानना यही है कि जिनके हाथों में सत्ता की चाबी है वह आरक्षण भी अपने हिसाब से ही कराते हैं वरना इस बार नगर परिषद के चुनाव को लेकर सामान्य वर्ग के लोगों की एक लंबी सूची चुनाव लड़ने के लिए तैयार देखी जा रही थी हालांकि उनके सपनों पर पानी फिरता हुआ देखा गया है लेकिन भोपाल से अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की प्रतिक्रिया पूर्ण हुई तो पलेरा नगर के सामान्य वर्ग के प्रत्याशियों को एक बड़ा झटका लग गया नगर परिषद पलेरा के अध्यक्षों के कार्यकाल पर एक पैनी नजर डाली जाए जिसमें सामान्य सीट में सबसे प्रथम अध्यक्ष के रूप में भगवंत प्रताप सिंह लल्लू राजा 4 जनवरी 1995 से 9 जनवरी 2000 तक  अध्यक्ष रहे इसके बाद यह सीट आरक्षित हो गई जिसमें नगर परिषद अध्यक्ष के रूप में हरिशंकर खटीक 10 जनवरी 2000 से 10 जनवरी 2005 तक अध्यक्ष ने इसके बाद नगर परिषद अध्यक्ष की सीट आरक्षक महिला हुई जिसमें हरिशंकर खटीक की धर्मपत्नी विंदेश्वरी खटीक 11 जनवरी 2005 से 11 जनवरी 2010 तक अध्यक्ष रही उसके बाद यह सीट आरक्षित पुरुष हुई जिसमें हरिशंकर खटीक के छोटे भाई सुनील खटीक 12 जनवरी 2010 से 11 जनवरी 2015 तक अध्यक्ष रहे इसके बाद यह सीट अनुसूचित जाति आरक्षित महिला हुई जिसमें फिर से विंदेश्वरी खटीक 12 जनवरी 2015 से 12 जनवरी 2020 तक भोपाल में नगर परिषद के अध्यक्षों के लिए चली आरक्षण प्रतिक्रिया में अब एक बार फिर नगर परिषद अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति आरक्षित पुरुष के लिए घोषित की गई आरक्षण की प्रतिक्रिया पूर्ण होते ही अब जनता के बीच तमाम उम्मीदवारों की दावेदारी दिखने लगी चुनावी तैयारियों को लेकर प्रत्याशियों के अपने-अपने समीकरण बनाने की रणनीति देखी जा सकती सियासी गणित यही है सभी अपने-अपने समीकरण तैयार कर रहे हैं कोई किसी से कम नहीं है सभी अपनी अपनी जगह मतदाताओं में पकड़ बनाते देखे जा सकते आखिर में चुनाव भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर को देखा जाएगा लोगों की माने तो चुनाव कहीं एकतरफा तो टीका नहीं है ?

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