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अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर जीवनशैली अपनाना आवश्यक ।


कोविड 19 बीमारी से उपजे तनाव के कारण 
विश्व में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में हुई बढ़ोतरी ।
ललितपुर (रमेश श्रीवास्तव ) । जागरूकता अभियान, ललितपुर एवं मुस्कुराएगा इंडिया पहल के संयुक्त तत्वाधान में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर  देश के प्रसिद्ध विद्वान मनोवैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों ने अपने अपने विचार रखे ।
नेहरू महाविद्यालय, ललितपुर के प्राचार्य एवं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के मनोविज्ञान संयोजक  डॉ. अवधेश अग्रवाल ने कहा कि प्रतिवर्ष 10 अक्टूबर को पूरे विश्व में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस  मनाया जाता है जिसका उद्देश्य लोगों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करना है साथ ही आम जनमानस को मानसिक रोगों से बचाने के  उपायों पर विचार करना है । विकास की दौड़ एवं प्रतिस्पर्धा के दौर के चलते उपजे तनाव के प्रति चिंता व्यक्त कर उनसे बचने और दूर करने के उपायों के बारे में विचार विमर्श किया जाता है।चूंकि पूरा विश्व मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हो रहा है और तनाव से दूर रहने के लिए प्रयास कर रहा है, तो  हम भी यह संकल्प लें कि किसी भी समस्या में अत्यधिक तनाव नहीं लेंगे।

राष्ट्रीय सेवा  योजना, उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के विशेष कार्याधिकारी एवं राज्य संपर्क अधिकारी डॉ . अंशुमालि शर्मा ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते उपजे तनाव के कारण  विश्व में  मानसिक स्वास्थ्य  समस्याएं तेजी से बढ़ रही है। तनाव और अवसाद के कारण आत्महत्याओं के मामले भी बढ़े हैं। लेकिन इस स्थिति से रोगियों को उबारने के लिए प्रशिक्षित मुस्कुराएगा इंडिया के काउंसलर की मेहनत रंग ला रही है।आम जनमानस को तनाव से निपटने में मदद मिल रही है।  राष्ट्रीय सेवा योजना ,उत्तर प्रदेश ,यूनिसेफ, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के सामूहिक प्रयास से प्रदेश भर में  मेंटल हेल्थ काउंसलर प्रशिक्षित किए गए जो प्रदेश के सभी जनपदों में अपनी निशुल्क मानसिक स्वास्थ्य परामर्श सेवाएं दे रहे हैं।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय,हरिद्वार (उत्तरांचल ) के शिक्षा एवं प्रशिक्षण संकायाध्यक्ष  एवं  मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ.सी.पी.खोखर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति की शारीरिक, सामाजिक,सांस्कृतिक, सुरक्षात्मक, संज्ञानात्मक एवं संवेगात्मक परिधियो के अंतर्गत अपनाएँ गये संतुलित व्यवहार में आनंद प्राप्त करने की नैसर्गिक व उपार्जित स्थिति है। मानसिक विकार की अनुपस्थिति और व्यावहारिक लचीलापन विशिष्ट रूप से मानसिक स्वास्थ्य के दो वृद्धि कारक हैं। वर्तमान स्थिति में अवसाद, दुश्चिंता, विखंडित मानसिकता व द्विध्रुवी जैसे विकारो से  स्वयं को मुक्त रखते हुए एक संतुलित संतुष्ट जीवन यापन करने वाला ही श्रेष्ठ मानसिक स्वास्थ्य धारक है।
महात्मा गांधी काशी, विद्यापीठ के  अवकाश प्राप्त प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान एवं भारतीय स्वास्थ्य मनोविज्ञान अकादमी, वाराणसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संज्ञानात्मक, व्यवहारिक और भावनात्मक कल्याण को प्रदर्शित करता है जिसमें व्यक्ति  जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है, उत्पादक रूप से काम कर सकता है, और अपने या अपने समुदाय के लिए सार्थक योगदान करने में सक्षम होता है।तनाव,अवसाद, और चिंता जैसी प्रमुख स्थितियां हमारे  मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं और व्यक्ति की कार्य क्षमता को बाधित करती हैं।मानसिक स्वास्थ्य कठिनाइयों का सामना करने वाले व्यक्ति को  आत्म कल्याण  के लिए अपनी जीवन शैली में परिवर्तन करने की आवश्यकता होती है।

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक (हरियाणा ) की  रिटायर्ड प्रोफेसर मनोविज्ञान एवं डीन, डॉ प्रोमिला बतरा ने कहा कि मन स्वस्थ तो तन स्वस्थ।मानसिक स्वास्थ्य न केवल प्रसन्नता अपितु शारीरिक स्वास्थ्य एवं सुखमय जीवन की राह बनाता है। सौपान 3C में छिपे हैं। र्चैलेंज, कमिटमेंट एंड कंट्रोल अर्थात चुनौती, प्रतिबद्धता एवं संचालन। हमें सिर्फ इतना सा परिवर्तन लाना है कि  तनाव, कुंठा, निम्न  मनोदशा जैसी परिस्थिति में  चिंता को गले लगाने की अपेक्षा हम इन्हें चुनौती के रूप में स्वीकार करें। यह स्वीकृति स्वत: ही हमें प्रतिबद्ध करती है सामना करने के लिए और हम संयमित रूप से नियंत्रित होकर वांछित कर्मों से लक्ष्य की और खुद को संचालित कर पाते हैं। आइए जीवन को सुगम बनाएं।

लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ की  मनोविज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ मानिनी श्रीवास्तव ने कहा कि केवल मानसिक बीमारी ना होना मानसिक स्वास्थ्य को नही  दर्शाता बल्कि
मानसिक परेशानी का बढ जाना  भी मानसिक स्वास्थ्य  को प्रभावित करता है। हमे इसे बिलकुल नजरअंदाज  नही करना चाहिए । यह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ  । हमारा मानसिक स्वास्थ्य हमारे लक्ष्य प्राप्ति, हमारे रिश्तों, हमारी सफलता,हमारी खुशी सबको प्रभावित करता है ।अच्छे  मानसिक स्वास्थ्य के लिए खुद से जुडे, मानसिक उलझन उतपन्न करने वाले कारणों को पहचान कर उनका समाधान निकालें, अपने लिये टाइम निकालें जब अपनी पसंद  का कार्य करें और शारीरिक व्यायाम जरूर करें ।

टी डी कॉलेज, जौनपुर के अवकाश प्राप्त मनोविज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य आज की ज्वलंत समस्या है ।वर्तमान दौर में कोरोना वायरस से उत्पन्न हुई महामारी के कारण लोगों का मानसिक स्वास्थ्य  तेजी से खराब  हो रहा है ।जब व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ रहेगा तभी उसका समायोजन स्तर जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में ठीक रहेगा।मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहे यह आवश्यक है कि पारिवारिकऔर समाजिक परिवेश शान्तिपूर्ण हो।सुखद अनुभूति और सामन्जस्यपूर्ण वैवाहिक जीवन हो।जब आह्लादपूर्ण जीवन होगा तो निश्चित ही मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहेगा।

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की मनोचिकित्सक एवं मानसिक स्वास्थ्य शोधकर्त्री डॉ. नीलम बेहरे (एम. डी.) बताती हैं कि अगर बहुत तेज धूप हो जाए जिसमें हमें परेशानी होने लगे तो हम छाया ढूंढते हैं।कोई यह नहीं कहता कि तुम्हारा आत्मबल कमजोर है या धूप में रहकर उसका सामना करो। कोई यह भी नहीं कहता कि धूप तुमने खुद बुलाई है। अवसाद ऐसी ही तेज धूप है उसके लिए छाया रूपी सहायता और इलाज ढूंढने की आवश्यकता होती है।

जे.एन.एम.पी.जी.कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ  की शिक्षाशास्त्र  विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रश्मि सोनी ने कहा कि जीवन है तो परेशानियां भी हैं,और जीवन के आखिरी सांस तक तनाव,परेशानियां उलझने एवं चुनोतियाँ है। यह सब चलते रहेंगे क्योंकि इनके ना होने का मतलब है मृत्यु। मानसिक स्वास्थ्य वह क्षमता है, इंसान की वह ताकत है जिस ताकत के बलबूते पर वह हर रोज जीवन में आने वाली परेशानियों सामना करता है और जीवन के उतार-चढ़ाव में अपने आप को समायोजित करता है। मानसिक स्वास्थ्य का तात्पर्य पागलपन से नहीं है,बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का मतलब है कि अपनी भावनाओं से अपने विचारों से अपनी आत्मा से अपने मन से स्वस्थ होना सकारात्मक होना है। 

रांची( झारखंड) से क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ अनुराधा वत्स बताती हैं कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार मानसिक विकारों से पीड़ित व्यक्तियों की विश्व में अनुमानित संख्या 450 मिलियन है ,जिनमें बच्चे एवं किशोर भी शामिल हैं।  डब्ल्यूएचओ  2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक 40 सेकंड में किसी ना किसी की मौत आत्महत्या से होती है। मानसिक स्वास्थ्य एक मानव अधिकार है ।मानसिक रोगों से बचने के लिए अपने परिवार से जुड़े रहे, परिजनों एवं रिश्तेदारों से बातचीत करते रहें ,सामाजिक सांस्कृतिक उत्सव में भाग लेते रहे,अच्छी किताबों का अध्ययन करें और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं। 

कॉटन विश्वविद्यालय ,गुवाहाटी (असम) के मनोविज्ञान विभाग की  संस्थापक प्रमुख डॉ.डिंपी महंत ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य में हमारे भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण शामिल हैं। यह हमारे सोचने, महसूस करने या कार्य करने के तरीके को प्रभावित करता है। अच्छा मानसिक स्वास्थ्य तनाव को बेहतर तरीके से संभालने में मदद करता है, अच्छे संबंधों को बनाए रखने और सही निर्णय लेने में मदद करता है। देखा जाए तो जीवन के प्रत्येक चरण में मानसिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है। मानसिक स्वास्थ्य जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है।
जब हम अवसाद, चिंता, अत्यधिक तनाव और अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं से मुक्त होते हैं, तो हम अपने जीवन को पूर्ण रूप से जीने में सक्षम होते हैं।

 मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, ललितपुर के संयोजक एवं मुस्कुराएगा इंडिया काउंसलर डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि सामाजिक सांस्कृतिक मनोवैज्ञानिक एवं आर्थिक समस्याओं के चलते व्यक्ति तनाव और अवसाद से ग्रस्त हो रहे हैं । हमें यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि  तनाव किसी भी समस्या का हल नहीं होता बल्कि कई अन्य शारीरिक  समस्याएं पैदा होती  है।  तनाव के कारण अत्यधिक सिरदर्द, माइग्रेन, उच्च या निम्न रक्तचाप, हृदय से जुड़ी समस्याओं  को उत्पन्न करता है। हार्ट अटैक का प्रमुख कारण मानसिक तनाव होता है।  तनाव,स्वभाव चिड़चिड़ा कर खुशी और मुस्कान को भी छीन लेता है,साथ ही सामाजिक संबंधों को निभाने में कठिनता पैदा करता है इससे बचने के लिए तनाव पैदा करने वाले कारणों को जीवन से दूर करना  बेहद आवश्यक है।
डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने सभी सम्मानित विद्वान मनोवैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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