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नेहरू महाविद्यालय,ललितपुर में मानसिक स्वास्थ पर आनलाइन बेबीनार सम्पन्न




 ललितपुर। राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वाधान में एवं मुस्कराएगा इंडिया के सयुक्त तत्वाधान में प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत नेहरू महाविद्यालय,ललितपुर ऑनलाइन वेबीनार आयोजित किया गया जिसमें महिलाओं से जुड़ी जानकारियां छात्राओं को दी गई। 

नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. अवधेश अग्रवाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य विकारों का सर्वाधिक प्रभाव युवाओं पर पड़ता है और चूँकि भारत की अधिकांश जनसंख्या युवा है इसलिये यह एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। इसके अलावा महिलाओं के प्रति घरेलू एवं यौन हिंसा छेड़छाड़, दफ्तरों में भेदभाव तथा उत्पीड़न आदि का मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे मानसिक स्वास्थ्य खराब होने के कारण लड़कियों एवं महिलाओं में नींद में कमी, चिड़चिड़ापन, भूख ना लगना ,दोस्तों से बात ना करना, घर से बाहर जाने पर कतराना ,नौकरी एवं रिश्ते को लेकर भय लगना आदि समस्या उत्पन्न हो सकती है। मानसिक समस्याओं का इलाज संभव है। निराश, हताश, डरने एवं घबराने की आवश्यकता नहीं होती तनाव उत्पन्न करने वाली परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करें। मानसिक मजबूती से आप किसी भी समस्या  पर विजय हासिल कर सकते हैं।

राष्ट्रीय सेवा योजना,ललितपुर के नोडल अधिकारी डॉ. ओ. पी. चैधरी ने बताया कि मिशन शक्ति सरकार द्वारा चलाई जा रही महिलाओं के कल्याण के लिए अत्यंत उपयोगी योजना है जिसके माध्यम से महिलाएं खुद को आत्मनिर्भर बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि महिला हेल्पलाइन नंबर 1076,1090,181 तथा 112 पर भी महिलाओं की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक महिलाओं को जागरूक कर रही है और उसे अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित कर रही है। यदि वे अपने भीतर निर्बलता का भाव नहीं आने दें तो कभी भी किसी भी व्यक्ति की हिम्मत उनके साथ अभद्रता करने की नहीं होगी,इसलिए उन्हें अपने अन्दर स्वाभिमान का भाव उत्पन्न करना होगा। 

नेहरू महाविद्यालय के मनोविज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं मुस्कुराएगा इंडिया काउंसलर डॉक्टर संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य में हमारा भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण शामिल होता है। यह हमारे सोचने, समझने, महसूस करने और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है। मानसिक स्वास्थ्य को उन्नत बनाने के उपाय के रूप में अपने मन को खुश रखने की कोशिश करें ,दोस्तों से बातचीत करते रहे ,योगा एवं  व्यायाम करते रहें ,अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करें ,जीवन के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाएं ,सामाजिक एवं सांस्कृतिक उत्सव में भाग लेते रहे ,किसी यात्रा पर जा सकते हैं ,लेकिन फिर भी अगर आपके मन की परेशानी कम ना हो तो किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए ,जब आप उनसे बात करेंगे तो आपको समस्या का समाधान मिल सकता है। 

गृहविज्ञान प्रवक्ता  कविता पैजवार ने महिलाओं एवं बालिकाओं को संबोधित किया और बताया कि बालिकाएं स्वयं को कमजोर न समझें महिलाएं और बालिकाओं का समाज के निर्माण में सदैव महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 

कार्यक्रम अधिकारी छात्रा इकाई डाॅ. राजेश तिवारी ने कहा कि लड़कियों एवं महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों के रूप में गरीबी ,अशिक्षा, समाज में निम्न स्तर, भेदभाव ,लड़कों की चाहत, पालन पोषण का अलग-अलग ढंग ,अधिक बच्चों का होना, समान अवसर का न प्राप्त होना है, हमें इसे दूर करना होगा।

बेबीनार में प्राचार्य डाॅ. अवधेश अग्रवाल, संस्कृत विभागाध्यक्ष डाॅ. ओमप्रकाश शास्त्री, अनिल सूर्यवंशी, डाॅ. रामकुमार रिछारिया, डाॅ. सुभाष जैन, डाॅ. अरिमर्दन सिंह, डाॅ. रिचाराज सक्सेना,  कविता पैजवार, श्वेता आनंद, निधि खरे, विवके पाराशर, फहीम बख्श, ध्रुव किलेदार, राजीव गोस्वामी, भरत सिंह सहित छात्रायें मानसी, साधना देवी, अंजली,  समीक्षा, सौम्या जैन, अर्पणा राजपूत आदि उपस्थित रहीं।


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