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ललितपुर के सौंरई गांव में ओडीएफ होने के बाद भी अधूरे पड़े इज्जत घर ।


गॉव में जगह-जगह लगे गन्दगी के ढेर नहीं होती सफाई ।
नवरात्रि पर्व पर श्रृद्धालुओं को आवागमन में हो रही है परेशानी ।
ललितपुर । सरकार भले ही गॉवो को  स्वच्छ और सुंदर बनाने के पैसा पानी की तरह बहा रही हो लेकिन मैं शासन की मंशानुरूप कार्य होता दिखाई नहीं दे रहा है । गांव को साफ स्वच्छ रखने एवं बीमारियों से बचाव के लिए सरकार खास तौर पर  सफाई अभियान एवं शौचालय निर्माण पर भी जोर दे रही है। वहीं जिम्मेदार लोग सरकार की इन योजनाओ को पलीता लगाने से बाज नही आ रहे है।जनपद के सबसे पिछड़े विकास खंड मड़ावरा की ग्राम पंचायत सौंरई में आज भी पिछले वर्ष के शौचालय  निर्माण अभी भी अधूरे पड़े है और गांव ओडीएफ हो गए हैं । लगभग 7 हजार की आबादी बाले सोंरई  ग्राम में 3300 मतदाता है ग्राम पंचायत में 3 सरकारी स्कूल एक इण्टर कालेज एवं एक शिशु मंदिर है। जिनकी सफाई के लिए शासन द्वारा कुछ समय पूर्व ही एक सफाई कर्मचारी की तैनाती की गई थी।इसके बावजूद भी ग्राम पंचायत में जगह जगह कूड़े के ढेर लगे हुए है नालिया कीचड़ से बजबजा रही है।गंदगी के ढ़ेर की बदबू से लोगो काफी परेशानियो उठानी पड रही है।वही गंदगी में पनप रहे मच्छरो के प्रकोप से ग्राम वासियो को बीमारियो का सामना करना पड रहा है।ग्रामीणों को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत लगभग 500 शौचालय आये थे।जिनको सरकारी कागजो में पूर्ण दर्शाकर ग्राम पंचायत को खुले में शौच मुक्त ग्राम का दर्जा प्राप्त करने का प्रयास जारी है।परन्तु आज भी गॉव में कुछ शौचालय अधूरे पड़े है।कई तो ऐसे शौचलयो का निर्माण पूर्ण दर्शा दिया जिनके गड्ढे भी नही खोदे गए।सवाल तो यह है की क्या ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव इनके गड्ढे नही खुदवा सके।
बिना गड्ढे के लाभार्थी इन शौचालयो का उपयोग कैसे करेगे यही विचरणीय है।वही कुछ लाभार्थियों के शौचालय बने होने के कारण पात्रता की सूची में नही आते है उन्हें नया दर्शाकर उनके किसी परिजन नाम सूची में दर्ज कर शासकीय धन का दुरूपयोग किया गया।वही कुछ गरीब आज भी शौचालय से वंचित है।ग्राम पंचायत में रमेश सुरेश गणेश  आदि के शौचलय अधूरे पड़े है।ग्रामीणों का कहना है कि अगर गहराई से गॉव में बनाये जा रहे आवास और शौचलायो की जाँच कराई जाये तो काफी अनिमिताये सामने आ सकती है।इस सम्बन्ध में कई बार ग्राम प्रधान से उनका पक्ष लेने के लिए सम्पर्क करने प्रयास किया गया पर प्रधान जी ने सम्पर्क करना उचित नही समझा।ग्राम पंचायत अधिकारी अलोक दुबे जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया की। शौचालय का पैसा दो किस्तो में दिया जाता है।दूसरी क़िस्त पहली बार दी हुई धनराशि से हुए काम के बाद दी जाती है।शौचालय में कुछ पैसा लाभार्थी का भी लग जाता है।

सफाई कर्मचारी नही आता गांव में सफाई करने ।

ग्रामीणों ने बताया की कई बर्षो बाद कुछ माह पूर्व ही ग्राम पंचायत में एक सफाई कर्मचारी की तैनाती की गई जो गॉव में कभी कभार आता है।सिर्फ ग्राम प्रधान के घर के सामने झाड़ू लगाने के बाद उनकी ही जी हजूरी में लगा रहता है। और ग्राम पंचायत में कही भी झाड़ू लगाना उचित नही समझता है।

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