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रोगों के बचाव हेतु जागरूकता आवश्यक: डॉ. संजीव


महामारी में विशेषज्ञ दिलायेगें मानसिक तनाव, अवसाद एवं चिंता से मुक्ति:
मानसिक रोगों से पनपती है नशाखोरी, अपराध एवं आत्महत्या जैसी समस्याएं:

ललितपुर- नेहरू महाविद्यालय,ललितपुर के असिस्टेंट प्रोफेसर मनोविज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के संयोजक एवं मुस्कुराएगा इंडिया काउंसलर डॉ संजीव कुमार शर्मा ने  बताया कि कोरोना महामारी के चलते उपजे तनाव को दूर करने के लिए  मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान  की शुरुआत की गयी।  जिसका उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को  ना सिर्फ मानसिक रोगों के प्रति जागरूक करना हैं बल्कि आम जनमानस को मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाना भी है। इस मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के तहत विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन निशुल्क  मानसिक स्वास्थ्य  परामर्श दिया जा रहा है ।  इनमें डॉ.संजीव कुमार शर्मा मनोवैज्ञानिक, ललितपुर (9473593205) डॉ. एस. पी.भारती, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट,मेरठ (9045885086) डॉ. नेहा आनंद, काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट,बोधिट्री, लखनऊ, (9005613442) डॉ. मनोज तिवारी,मनोवैज्ञानिक, बीएचयू,वाराणसी (9415997828) डॉ.अनुराधा वत्स, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, रांची, झारखंड,(8271430678) डॉ.नीलम शुक्ला, क्लीनिकल एवं रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजिस्ट,भोपाल, मध्य प्रदेश (9770325464)  से शाम 4:00 से 6:00 तक निशुल्क ऑनलाइन परामर्श  ले सकते हैं।
इस अभियान के तहत लोगो को मानसिक रोगों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए  मनोवैज्ञानिक समस्याओं से संबंधित शोधलेख  प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में प्रकाशित कराये जा रहे है।   
 डॉ.शर्मा ने  आगे बताया कि विश्व स्वास्थ्य  संगठन की एक  रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 7.5 प्रतिशत भारतीय किसी-न-किसी रूप में मानसिक रोगों से ग्रस्त हैं। साथ ही डब्ल्यूएचओ के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2020 तक भारत की लगभग 20 प्रतिशत आबादी मानसिक विकारो से पीड़ित होगी। मानसिक रोगियों की इतनी बड़ी संख्या के बावजूद भी  यहाँ मानसिक स्वास्थ्य की पूर्णतः उपेक्षा की जाती है और इसे काल्पनिक बीमारी ही समझा जाता है। जबकि वास्तविकता यह है कि जिस प्रकार शारीरिक बीमारी हमारे लिये हानिकारक हो सकते हैं उसी प्रकार मानसिक बीमारी भी हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते। डब्ल्यू. एच. ओ. के अनुसार, वर्ष 2020 तक अवसाद दुनिया भर में दूसरी सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या होगी।
मानसिक बीमारी कई सामाजिक समस्याओं जैसे- बेरोज़गारी, गरीबी, नशाखोरी ,अपराध, आत्महत्या आदि को जन्म देती है। मानसिक रोगो के संबंध में जागरूकता की कमी भी भारत के समक्ष मौजूद एक बड़ी चुनौती है। देश में जागरूकता की कमी और अज्ञानता के कारण लोगों द्वारा किसी भी प्रकार के मानसिक स्वास्थ्य समस्या  से ग्रसित व्यक्ति को पागल ही समझा जाता है एवं उसके साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध जानवरों जैसा व्यवहार किया जाता है।रोगी को तिरस्कारपूर्ण व्यवहार का  सामना करना पड़ता हैं, जबकि रोगी को परानुभूति की जरूरत होती है। मानसिक रोगों और लक्षणों के संबंध में जागरूकता की कमी के कारण अक्सर रोगी और समाज के अन्य लोगों के बीच एक अलगाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और रोगी को सामाजिक अलगाव का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उसकी स्थिति और खराब हो सकती है।मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने और जागरूकता बढ़ाने  की आवश्यकता है। देश में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्या लगातार बढती जा रही है। ऐसे में आवश्यक है कि इससे निपटने के लिये इसके संबंध में जागरूकता बढ़ाना भी एक महत्त्वपूर्ण कदम हो सकता है, क्योंकि जागरूकता की कमी के कारण ही कई रोगियों को अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ता है।

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