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भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारियों की बदौलत महिला कर्मचारी नौ नौ आंसू रोने को मजबूर ।


ललितपुर कलैक्ट्रेट में रो-रो कर महिला पंचायत सचिव ने सुनाई अपनी व्यथा ।
उत्पीडन से तंग आकर महिला कर्मचारी ने न्याय न मिलने पर आत्म हत्या करने की दी चेतावनी ।

ललितपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही प्रदेश को अपराध एवं भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए दिन रात एक कर रहे हों लेकिन जिन अधिकारियों के साथ वह यह सपना देख रहे हैं उनमें कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री के सपनों पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे  हैं । मुख्यमंत्री प्रदेश में मिशन शक्ति अभियान के तहत महिला हैल्प डेस्क की स्थापना कर महिलाओं का उत्पीडन रोकने एवं उन्हें शसक्त बनाने के लिए मुहिम जनता के बीच चला रहे हैं वहीं उनकी सरकारी मशीनरी महिलाओं का उत्पीडन कर के महिला सुरक्षा एवं उत्पीडन के प्रति गंभीर नहीं दिख रहे हैं ।यैसा ही मामला शनिवार को ललितपुर जनपद में देखने को मिला जहां पर एक महिला कर्मचारी जो पंचायत सचिव के पद पर तैनात है उसे वर्षों से जमे एवं भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारियों द्वारा इतना परेशान किया जा रहा है की वह नौ नौ आंसू रोने को मजबूर हैं । उसने रो-रोकर अपनी व्यथा पत्रकारों को सुनाई  वह उत्पीड़न से इतनी आहत हैं की वह आत्म घाती कदम तक उठा  सकती है ।
शनिवार को कलैक्ट्रेट परिसर में जब एक महिला कर्मचारी रोते हुए उपस्थित हुई तो वहां मौजूद  लोगों और पत्रकारों में जिज्ञासा का विषय बन गया।  कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद कई लोगों के साथ पत्रकारों और  एलआईयू अधिकारियों के बीच महिला रो-रो कर अपना दुखड़ा  सुना रही थी । उसका कहना है की वह सरकार की मंशा के अनुरूप ईमानदारी से काम नहीं कर पा रही है । ईमानदारी से काम करना उसे इतना भारी पड़ गया कि अपनी 3 साल की नौकरी में उसे 2 बार निलंबन का दंश झेलना पड़ा और चार विकास खंडों में उसका तबादला उच्च अधिकारियों द्वारा  किया गया। उसने कुछ अधिकारियों को भ्र्ष्टाचार के खेल में संलिप्त होने से मना कर दिया था जिसका नतीजा यह हुआ की उसे किसी भी विकासखंड में कोई कार्यभार या ग्राम पंचायत नहीं सौंपी गई और यदि सौंपी गई तो एक साथ एक ग्राम पंचायत में 2 ग्राम पंचायत अधिकारियों की नियुक्ति के साथ सौंपी गई। जिसके चलते ना तो वह ईमानदारी से काम कर पा रही है और ना ही सरकार की मंशा पर खरा उतर पा रही है ।जब भी वह ईमानदारी के साथ काम करती है तभी वह बेईमान किस्म के ग्राम प्रधानों अधिकारियों और कर्मचारियों की नजरों में खटकने लगती और   अधिकारी और कर्मचारी उसे निलंबित कर देते हैं। पीड़ित महिला कर्मचारी ने अपना नाम डोली ठाकुर बताया है, और वह जनपद में ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर नियुक्त है वह झांसी जनपद के अंतर्गत गुरसराय की रहने वाली है। उसने रोते हुए कहा कि यदि उसकी बात नहीं सुनी गई या उसे इंसाफ नहीं मिला तो वह इतनी दुखी है कि वह आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठा सकती है।” इतना ही नहीं उसने जिला अधिकारी अन्नवी  दिनेश कुमार से मिलने की चार बार कोशिश की लेकिन निचले स्तर के कर्मचारियों ने उसे जिला अधिकारी से नहीं मिलने दिया। महिला ग्राम पंचायत अधिकारी ने जनपद के कई प्रधानों अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से होने वाले घोटालों पर उंगली उठाई । उसका कहना है कि जनपद में सरकार की मंशा के अनुरूप जो भी धनराशि विकास कार्यों के लिए भेजी जाती है उनमें बड़ी मात्रा में भ्रष्टाचार और घोटाला किया जा रहा है एवं सरकार की मंशा और छवि को धूमिल करने का काम किया जा रहा है । जबकि सरकार की मंशा ईमानदारी की है लेकिन अधिकारी कर्मचारियों और ग्राम प्रधान मिलकर सरकार को ही झूठा साबित करने में लगे हुए हैं। ललितपुर जनपद में ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर अधिकारी और कर्मचारी सरकारी धन का बंदरबांट कर के मौज कर रहे हैं जबकि जरूरतमंद गरीब अधिकारी कर्मचारियों प्रधानों और कोटेदारों के चक्कर लगा रहे  लेकिन उन्हें सरकार की मंशा के अनुरूप योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है । यदि जनपद में सरकार द्वारा बारीकी से विकास कार्यों की जांच कराएं तो बड़े  बड़े भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो सकते हैं।यैसे ही भ्रष्ट अधिकारी सरकार की छवि खराब कर रहे हैं एवं मंशा पर भी पानी फेर रहे हैं  ।

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