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अपराधियों पर कार्यवाही से कतरा रही पुलिस ।


राशन बिक्रेता के परिवार को जान-माल का खतरा, पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार ।
जांच के नाम पर एक माह से किया जा रहा गुमराह।
टीकमगढ़। पुलिस का रवैया इन दिनों महाराष्ट्र ही नहीं मध्यप्रदेश में भी कुछ ठीक नहीं है। न्याय के लिये गुहार लगाने वालों की जहां फरियाद नहीं सुनी जा रही है,  आरोपियों
पर एक माह से किसी तरह की कार्रवाई न होने से फरियादी के परिजनों में भय व्याप्त है।  जांच के नाम पर एक माह से फाइल को अधर में लटकाने वालों के साथ ही आरोपियों पर कार्रवाई करने की पुलिस अधीक्षक से  गुहार लगाई है। वार्ड नंबर 23 राशन दुकान पर कार्य करने वाले मजदूरों एवं वितरक के साथ गाली गलौज करने वालों के हौसले कार्रवाई न होने से बुलंद बने हुये हैं। दहशतजदा राशन वितरक वार्ड नंबर 23 मकबूल खां पुत्र मुहम्मद खां निवासी मामौन दरवाजा ने पुलिस अधीक्षक को दिये गये आवेदन में बताया कि वह 9 सितम्बर को राशन दुकान पर रोज की तरह राशन वितरण कर रहा था। इसी बीच करीब 11.30 बजे के लगभग कलीम खान का पुत्र इरफान खां उर्फ टिक्की ने सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ाते हुये दुकान में प्रवेश किया और राशन वितरण करने के लिये बोला। जब उससे कतार में आने और सोशल डिस्टेंस का पालन करने के लिये बोला, तो वह भड़क उठा। राशन बिक्रेता ने बताया कि इतना ही नहीं आरोपी टिक्की उर्फ इरफान ने दुकान की बोरियां तितर-बितर कर डाली। जब मना किया तो उन्होंने गाली-गलौज करते हुये जान से मारने की धमकी दी और लात-घूसों से मारपीट कर  दी। इस दौरान कुछ लोगों ने बीच-बचाव किया। घटना को एक माह होने के बाद भी पुलिस आरोपी पर हाथ डालने से बच रही है, जिससे वह बेखौफ होकर बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में है। चौकाने वाली बात तो यह है कि शासकीय राशन दुकान पर हंगामा करने के बाद भी पुलिस एक माह से जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डाले हुये है, जबकि फरियादी के परिजनों में घटना के बाद से भय बना हुआ है। उन्होंने कहा है कि यदि इस बीच में किसी तरह की बड़ी वारदात होती है, तो इसके  लिये पुलिस प्रशासन और आरोपी के परिजनों को जिम्मेदार माना जाए।

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