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परिवार एवं समाज की सकारात्मक सोच से महिला सशक्तिकरण संभव: डॉ अग्रवाल

नेहरू महाविद्यालय ललितपुर में महिलाओं के सशक्तिकरण में समाज की भूमिका पर  वेबीनार  संपन्न:
ललितपुर।  उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मिशन शक्ति के तहत राष्ट्रीय सेवा योजना एवं मुस्कुराएगा इंडिया पहल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित  वेबिनार को संबोधित करते हुए नेहरू महाविद्यालय ललितपुर के  प्राचार्य डॉ अवधेश अवधेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि  वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महिलाओं की स्थिति विकास और उनके सशक्तिकरण का मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण है । जिस तरह  देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, औद्योगीकरण, रोजगार, नगरीकरण के क्षेत्र में वृद्धि  हो रही है, उसके सापेक्ष महिलाओं की स्थिति उतनी संतोषप्रद नहीं दिखाई देती। हालांकि कुछ दशकों से हमारे देश में महिलाओं की शैक्षिक स्थिति में सुधार आया है। हमारे देश में महिलाओं की शिक्षा का स्तर नगरीय क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत कम है। जिसके कारण महिलाएं पुरुषों पर आश्रित रहती हैं या अन्य निम्न स्तर और अथक परिश्रम वाले कामों को करने के लिए मजबूर होती हैं। अगर हम स्वास्थ्य के संबंध में बात करें तो  पाते हैं कि ग्रामीण, दुर्गम और पर्वतीय इलाकों में प्रसव की समुचित स्वास्थ्य सुविधा न मिलने से कई प्रसूता महिलाओं की मौत तक हो जाती है। 
नेहरू महाविद्यालय के मनोविज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं  मुस्कुराएगा इंडिया काउंसलर डॉ संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण में समाज की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण है। देश की समग्र प्रगति तब तक नहीं हो सकती, जब तक उस देश की राजनीति से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में वहां की महिलाएं सशक्त बन कर न उभरी हों। तमाम प्रभावी नीतियों और योजनाओं के बावजूद हकीकत यह है कि महिलाएं व्यावहारिकता में अब भी तरह-तरह की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं से जूझ रही हैं।महिलाओं को आर्थिक रुप से निर्भर बनाने की आवश्यकता है ।
समाजशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर सुभाष चंद्र जैन ने कहा असमान लिंग अनुपात, भेदभाव,  हिंसा, कुपोषण और महिलाओं में बीमारियों की अधिकता जैसे कई सवाल महिलाओं के जीवन को प्रभावित करते हैं।  खेती, उद्योग, खनन और अन्य से जुड़े कार्यों में महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा बेहद कम पारिश्रमिक मिलता है। बड़ी विडंबना है कि महिलाएं जो अपने घर-परिवार में खेती-बाड़ी, पशुपालन और अन्य घरेलू कामों में दिन-रात लगी रहती हैं, उनके इस परिश्रम की कोई भी कीमत नहीं आंकी जाती और न ही उन्हें इस काम का  श्रेय मिलता है।निश्चित तौर पर यह मानना होगा कि जब तक परिवार और समाज सकारात्मक सोच के साथ आगे नहीं बढ़ेगा, तब तक महिलाओं के विकास और सशक्तिकरण की बातें करना महज एक कल्पना ही होगी।
राष्ट्रीय सेवा योजना छात्रा इकाई  के कार्यक्रम अधिकारी डॉ राजेश कुमार तिवारी ने कहा कि समाज में प्रत्येक पुरुष और महिला को संविधान द्वारा समान तौर पर समस्त मूलभूत अधिकार दिए गए हैं, लेकिन फिर भी किसी न किसी रूप में सामाजिक रूढ़िवादी मान्यताओं और विषमताओं के कारण महिलाएं अपने अधिकारों से वंचित रह जाती हैं। अत: इस महत्त्वपूर्ण मुद्दे के समाधान की दिशा में हमारे देश में स्थित कई सरकारी, गैर सरकारी और स्वैच्छिक संस्थाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सहयोग लेकर अपने स्तर पर प्रयास कर रही हैं। इस क्षेत्र में सतत प्रयास करने की आवश्यकता है।
वेबिनार में डॉक्टर सूबेदार यादव, डॉक्टर ओपी चौधरी ,डॉक्टर उषा तिवारी , डॉ पराग अग्रवाल ,शिवानी राजा, कीर्ति मिश्रा प्रीति जैन पूजा रैकवार शिवानी नामदेव  सविता कुशवाह वंशिका कौशिक सुकन्या राजपूत आदि ने प्रतिभाग किया

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