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नगर की महिलाओं ने हल छठ व्रत रखा श्रद्धा भाव से की पूजा अर्चना ,बलराम जयंती हल छठ पूजन विधि और व्रत कथा


  टीकमगढ़ (मनीष यादव ) । आज हल छठ के दिन घर घर हलछठ की पूजा अर्चना की गई हल छठ के दिन नगर की महिला ने व्रत रखा पुत्र की लंबी आयु की कामना और पशुधन इसी दिन बलदाऊ महाराज का जन्म उत्सव घर घर मनाया गया पूजा अर्चना महिलाओं और किसान परिवारों में संपन्न हुई
हल छठ के दिन सभी माताएं पुत्र की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखती हैं। यह दिन भगवान कृष्‍ण के ज्‍येष्‍ठ भ्राता बलराम जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बलराम जी का जन्‍म हुआ था और उनका मुख्‍य शस्‍त्र हल था इसलिए इसे हल छठ भी कहते हैं। आइए जानते हैं कैसे रखा जाता है यह व्रत और क्‍या है पूजन की विधि ।

क्‍या है हलषष्‍ठी का व्रत
भाद्र मास के कृष्‍ण पक्ष की षष्‍ठी को हल षष्‍ठी कहते हैं। कई जगहों पर हल छठ, ललही छठ या फिर तिनछठी भी कहा जाता है। इस व्रत में हल से जुती हुई अनाज व सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता है। इसलिए महिलाएं इस दिन तालाब में उगे पसही या तिन्नी के चावल खाकर व्रत रखती हैं। इस व्रत में गाय का दूध व दही इस्तेमाल में नहीं लाया जाता है। इस दिन महिलाएं भैंस के दूध, घी और दही इस्तेमाल करती है।

इस दिन बैल की पूजा
किसानों के घर में इस दिन हल की और बैल की पूजा की जाती है। महिलाएं पुत्र की रक्षा के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को तिन्‍नी के चावल खाकर पारण करती हैं

हलषष्ठी 2020 : संतान की दीर्घायु के लिए रखा जाता है व्रत, जानें इसका महत्व व पूजा विधि

भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई के जन्मोत्सव पर रखते हैं व्रतउन्हीं के नाम पर इस पर्व का नाम 'हलषष्ठी या हरछठ' पड़ाश्री कृष्ण जन्माष्टमी के दो दिन पहले यह व्रत रखा जाता है भादो महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को हल षष्ठी व्रत किया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन श्री बलरामजी का जन्म हुआ था। इस बार नौ अगस्त यानी रविवार को हलषष्ठी या ललही छठ का व्रत रखा जाएगा। श्री बलरामजी का प्रधान शस्त्र हल तथा मूसल है। इसी कारण उन्हें हलधर भी कहा जाता है। उन्हीं के नाम पर इस पर्व का नाम 'हलषष्ठी या हरछठ' पड़ा। 

जन्माष्टमी के दो दिन पहले यह व्रत रखा जाता है और इसी दिन श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। इसे बलराम जयंती के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत केवल पुत्रवती महिलाएं ही करती हैं।

संतान की लंबी उम्र की कामना के व्रत हलषष्ठी में आस्था का संचार होता है। माताएं व्रत पूजन के साथ ही अपनी संतान की दीर्घायु की कामना करती हैं। इस दौरान कठोर व्रत नियम के पालन के साथ ही माताएं अपनी संतान की मंगल कामना के लिए पूजन करती हैं।

भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम को बलदेव, बलभद्र और बलदाऊ के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू ज्योतिशास्त्र के अनुसार बलराम को हल और मूसल से खास लगाव था इसीलिए इस त्योहार को हल षष्ठी के नाम से जाना जाता है।

बलराम जयंती के दिन किसान वर्ग खास तौर पर पूजा करते हैं। इस दिन हल, मूसल और बैल की पूजा करते हैं। हलषष्ठी या हल छठ पर मूसल, बैल व हल की पूजा की जाती है इसीलिए इस दिन हल से जुती हुई अनाज व सब्जियों व हल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

हलषष्ठी पर ऐसे की जाती है पूजा ....

- सबसे पहले तो आप इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं। फिर प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।
- इसके पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर गोबर लेकर आएं।
- इसके बाद पृथ्वी को लीपकर एक छोटा-सा तालाब बनाएं।
- इस तालाब में झरबेरी, ताश तथा पलाश की एक-एक शाखा बांधकर बनाई गई 'हरछठ' को गाड़ दें।
- कच्चे जनेउ का सूत हरछठ को पहनाते हैं.
- तत्पश्चात इसकी पूजा करें।
- भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का अस्त्र हल होने की वजह से महिलाएं हल का पूजन करती है।
- पूजा में सतनाजा (चना, जौ, गेहूं, धान, अरहर, मक्का तथा मूंग) चढ़ाने के बाद धूल, हरी कजरियां, होली की राख, होली पर भुने हुए चने के होरहा तथा जौ की बालें चढ़ाएं।

- हलषष्ठी में बिना हल लगे अन्न और भैंस के दूध का उपयोग किया जाता है. इसके सेवन से ही व्रत का पारण किया जाता है।
- इसको हलषष्ठी, हलछठ , हरछठ व्रत, चंदन छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ, ललही छठ, कमर छठ, या खमर छठ भी कहा जाता है।
- हलषष्ठी के समीप ही कोई आभूषण तथा हल्दी से रंगा कपड़ा भी रखें।
- पूजन करने के बाद भैंस के दूध से बने मक्खन द्वारा हवन करें।
- इस व्रत में गाय का दूध व दही इस्तेमाल में नहीं लाया जाता है इस दिन महिलाएं भैंस का दूध ,घी व दही इस्तेमाल करती हैं।

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