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स्ट्रिंगर्स की कहानी बया करेगी पुस्तक स्ट्रिंगर


कई पुस्तकों के लेखन में जुटे डॉ. नरेंद्र


  बुंदेलखंड की पत्रकारिता में शीर्ष पर कायम रहने वाले सहारा समय न्यूज चैनल के टीकमगढ़ जिले के संवाददता डॉ. नरेंद्र अरजरिया पिछले कुछ माह से पुस्तकों के लेखन कार्य में पूर्णरूप से जुटे हुए हैं। डॉ. नरेंद्र एक साथ चार पुस्तकों का लेखन इस समय कर रहे हैं। जिसमें स्ट्रिंगर नाम की एक दिलचस्प पुस्तक भी शामिल है। इस बुक में न सिर्फ जिला एवं तहसील स्तर पर कार्यरत स्ट्रिंगर्स का संर्घष है, बल्कि पिछले दो दशकों से सहारा के मजबूत साथ का एक लंबा एवं शानदार अनुभव भी है।  उन्होंने अपनी पत्रकारिता के दौरान स्ट्रिंगर की लाइफ को काफी करीब से देखा है। एक चर्चा में डॉ. नरेंद्र कहते हैं कि आज भी सारे  रीजनल और नेशनल चैनल स्ट्रिंगर पर ही पूर्णरूप से निर्भर हैं।  जिनकी ग्राउंड रिपोर्ट पर बुलेटिन की हेडलाइन बनती है, बिना संसाधनों और सहयोग के उनसे खबरें भी ली जाती हैं और विज्ञापन का टॉरगेट भी सौंपा जाता है। इसके बाद भी इन कॉपरेट मीडिया हाउसेस व सरकार द्वारा लगातार इनकी समस्याओं को नजर अंदाज किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर नेता माफिया और प्रशासन से उन्हें जूझना पड़ता है। यहां तक कि कई स्ट्रिंगर ने  मौत को गले लगा लिया है। यह पुस्तक स्ट्रिंगर्स की चुनौतियां और संर्घष की दास्ता पर ही आधारित है। तहसील से लेकर प्रदेश स्तर पर स्ट्रिंगर के तौर पर काम करने वाले युवा पत्रकारों के लिए यह पुस्तक मार्गदर्शन का काम करेगी।  इस ईश्वरीय कार्य में डॉ. नरेंद्र का मार्गदर्शन खुद उनके महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के पत्रकारिता के गुरू प्रो. वीरेंद्र व्यास कर रहे हैं। पाठकों और मीडिया जगत से संबंध रखने वालों के बीच इन पुस्तकों की बेसब्री से प्रतीक्षा चल रही है। पुस्तक के सफल प्रकाशन के लिए बधाईयों का सिलसिला भी प्रारंभ हो चुका है।

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